बुधवार, 4 फ़रवरी 2009

चुनाव

चुनाव की रंगत निराली

कुर्शी की महिमा हे बड़ी निराली

गिराने उठाने अपना मतलब साधने मै लगी पार्टिया सारी

जूठे दाव पेच मै उलझी जनता बेचारी

इन नेताओ ने खूब चली चल सायानी

खड़ोको भरवा दिया पानी पर सड़क को बनवा दिया

खम्बो पर तार टंगवा दिया दुर्घटना होने लगी भारी

चुनाव की रंगत निराली

जो पूर्णिमा के चाँद थे

वे बोलने लगे मुर्गे की बांग पायरी

चुनाव की रंगत निराली

वोट की खातिर करते ये करामत भारी

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